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समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव samajwadi parti 2022

 समाजवादी पार्टी  का उदय


भारतीय आधुनिक इतिहास की शुरुआत स्वतंत्रता के बाद होती है ।भारतीय राजनीति में नेहरू परिवार का सत्ता उपहार स्वरूप प्राप्त हुआ जाहिर सी बात है किसी व्यक्ति जो उस पद के काबिल ना हो और उस वह पद प्राप्त हो जाती है तो उसके विरोध में कोई ना कोई जो उस पद को अपने योग्य समझता है आजाता है।


नेहरू और कांग्रेस के विरोध में उस समय  हिंदी भासी क्षेत्र में दो  संगठन खड़े हुए एक राष्ट्रीय स्वेम सेवक संघ और राम मनोहर  लोहिया के नेतृत्व में समाजवादी उत्तर प्रर्टी।


लोहिया के नेतृत्व में जो व्यक्ति थे उसमें थे चौधरी चरण सिंह जो राम मनोहर लोहिया के संगठन के एक लोकप्रिय व्यक्ति थे। चौधरी चरण सिंह जो किसान नेता के रूप में बाद में प्रतिष्ठित हुए और मुख्मंत्री और प्रधानमंत्री हुए।


चौधरी चरण सिंह के सहयोगी में थे मुलायम सिंह यादव जिन्होंने समाजवादी पार्टी की स्थापना किया। कांग्रेस के उत्तर प्रदेश में कम होती लोकप्रियता को मुलायम सिंह यादव ने भरपूर लाभ उठाया और मुख्मंत्री के रूप में सत्ता का लाभ  प्राप्त किया।


कांग्रेस के तुष्टि कारण के नीतियों और परिवार बाद से पीछा छुड़ाकर एक मौका था समाजवादी पार्टी के पास अपने को सर्वमान्य नेता के रूप में स्थापित होने का परंतु समाजवादी पार्टी ने यह मौका को भुनाने में असफल रही।


अखिलेश यादव और भारतीय जनता पार्टी की सफलता


अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश के राजनीत में अनजान नाम नहीं है। अखिलेश यादव मुलायम सिंह के पुत्र है और भूतूर्व मुख्य मंत्री रह चुके है। उत्तर प्रदेश की जनता ने अखिलेश को चूना जिसकी वजह थी उनका कम उम्र का होना और शिक्षित होना।


समाजवादी  पार्टी को एक नेतृत्व मिला मुलायम सिंह के कम होती लोकप्रियता के कारण परंतु नीतियों के अभाव से कोई लाभ प्राप्त नहीं हुआ। हालांकि उत्तर प्रदेश के राजधानी में बहुत अच्छे कार्य हुए है परन्तु सम्पूर्ण उत्तर प्रदेश की जनता असंतुष्ठ थी।


समाजवादी  पार्टी




2022 में अवैसी के आगमन से पार्टी पर असर


2020 के चुनाव में अवैसी के द्वारा किया गया ऐलान कि आईआईएएम उत्तर प्रदेश में भी चुनाव लडेगी का प्रभाव होना निश्चित है इसका असर बिहार चुनाव में देखा जा चुका है।


उत्तर प्रदेश में इसका असर ज्यादा होने वाला है क्योंकि राजभर और कुछ समाजवादी लोगों को मत विभाजित होगा जिसका लाभ भारतीय जनता पार्टी को मिलना तय है।


अवैसी का असर से पिछड़े वर्ग और अनुसूचित जाति के मत भी विभाजित होंगे जिसका लाभ भारतीय जनता पार्टी को होगा।


भीम आर्मी और  सुसपा ने समाजवादी पार्टी और बहुजन समजवादी पार्टी को पहले से ही नुकसान कर रहें है अवैसी के आने से मुस्लिम वोट भी विभाजित होंगे जो इन दोनों पार्टी को ही नुकसान करेंगे।


अखिलेश को असफल होने के वजह एक और भी हो सकती है जो है राष्ट्रीय पटल पर होने वाले लोकप्रिय फैसले को केंद्र के द्वरा लिया जा रहा है का कांग्रेस की तरह विरोध।


कांग्रेस की असफलता से लगता है की कोई सीख प्राप्त नहीं हो रही है  समाजवादी नेता को मोदी जी का अंध विरोध अंततः अखिलेश को नुकसान ही पहुचायेगा। इस में मायावती अपेक्षाकृत संयम रख रही है।



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